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- कैशलेस सेवा बंद होने से जेब पर बोझ
- बैठक के बाद उग्र आदोलन की संभावना
भीलवाड़ा लोकजीवन। सुबह से ही शहर के निजी अस्पतालों के बाहर असमंजस का माहौल रहा। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत इलाज कराने पहुंचे बुजुर्ग पेंशनर्स और सरकारी कर्मचारी उस वक्त हतप्रभ रह गए, जब उन्हें बताया गया कि अब कैशलेस सुविधा बंद है। कई मरीजों को बीच इलाज में ही भुगतान कर दवाइयां लेनी पड़ीं, तो कुछ ने भारी बिल देखकर सरकारी अस्पतालों की राह पकड़ी। रामलाल शर्मा जो तिलकनगर के एक अस्पताल में हृदय रोग के इलाज के लिए आए थे, बोले हमने सोचा था कि कार्ड दिखाकर इलाज हो जाएगा, लेकिन यहां तो पैसे जमा कराने को कहा गया। ऐसे ही सैकड़ों मरीजों की परेशानी ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर अचानक दबाव बढ़ा दिया है।
24 घंटे का ब्लैकआउट, निजी अस्पतालों में सन्नाटा
प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत निजी अस्पतालों में 24 घंटे का ब्लैकआउट लागू रहा। ओपीडी, आईपीडी और कई जगह इमरजेंसी सेवाएं भी बंद रहीं। भीलवाड़ा में भले यह सेवाएं बंद नहीं हुई, लेकिन आरजीएचएस से जुड़ी हर सुविधा ठप रही। इसका सीधा असर सरकारी अस्पतालों पर दिखा, जहां मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई। डॉक्टरों और स्टाफ पर दबाव कई गुना बढ़ गया, जिससे व्यवस्थाएं लडख़ड़ाने लगीं।
डॉ. बंसल की गिरफ्तारी चिकित्सा जगत का अपमान - आईएमए
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के बैनर तले डॉक्टरों ने साफ कहा कि जयपुर के डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी ने पूरे चिकित्सा जगत को आहत किया है। आईएमए भीलवाड़ा अध्यक्ष डॉ. दुष्यंत शर्मा के अनुसार, जब मेडिकल बोर्ड ने लापरवाही नहीं मानी, तो तकनीकी आधार पर गिरफ्तारी करना गलत है। यह पूरे डॉक्टर समुदाय का अपमान है। उनका यह भी आरोप है कि अस्पतालों पर बिना ठोस आधार के पेनल्टी लगाई जा रही है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ रहा है। आरजीएचएस योजना में भुगतान का मुद्दा भी इस विवाद की बड़ी वजह बनकर उभरा है। प्रदेशभर में करीब 900 करोड़ रुपए का भुगतान लंबित है, जबकि भीलवाड़ा जिले में ही करीब 18 करोड़ रुपए पिछले आठ महीनों से अटके हुए हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि बिना भुगतान के सेवाएं देना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में या तो सरकार समय पर भुगतान करे या फिर पुनर्भरण व्यवस्था लागू करे, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
आगे और सख्ती या...बैठक में तय होगी रणनीति
भीलवाड़ा में मंगलवार रात 8 बजे आईएमए की अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें आंदोलन को आगे बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा। संकेत हैं कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो यह विरोध अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल सकता है। इधर, सरकारी डॉक्टरों ने भी काली पट्टी बांधकर नैतिक समर्थन देने की घोषणा की है। इससे साफ है कि मामला अब सिर्फ निजी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे चिकित्सा तंत्र में असंतोष गहराता जा रहा है।
लोकजीवन का नजरिया...
आरजीएचएस जैसी जनहितकारी योजना का ठप होना सिर्फ एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि आम आदमी की जिंदगी से जुड़ा संकट बन गया है। मरीजों की बढ़ती परेशानी और डॉक्टरों के आक्रोश के बीच अब नजरें सरकार और आईएमए की अगली बातचीत पर टिकी हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव स्वास्थ्य सेवाओं को और गहरे संकट में डाल सकता है।
फैक्ट फाइल....
- भीलवाड़ा में कुल निजी अस्पताल - 22
- आरजीएचएस से जुड़े अस्पताल - 10
- भीलवाड़ा में लंबित भुगतान - 18 करोड़ रुपए
- प्रदेशभर में लंबित भुगतान - 900 करोड़ रुपए
- ब्लैकआउट अवधि: 24 घंटे कल सुबह 8 बजे तक
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