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कोयंबटूर । तिरुप्पुर के निटवियर (होजरी) और कपड़ा उद्योग ने केंद्र सरकार के कपास आयात पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) को अस्थायी रूप से हटाने के फैसले का स्वागत किया है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यह समय पर उठाया गया कदम है, जिससे उत्पादन लागत कम होगी, कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी और भारत के कपड़ा व परिधान निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
केंद्र सरकार ने 1 जून से 30 अक्टूबर तक कपास के आयात पर सभी सीमा शुल्क से अस्थायी छूट देने की घोषणा की है। यह फैसला बढ़ती कपास कीमतों और कपड़ा उद्योग के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
उद्योग जगत के नेताओं का कहना है कि इससे निर्माताओं, निर्यातकों और स्पिनिंग मिलों को बड़ी राहत मिलेगी, जो पिछले कई महीनों से कच्चे माल की बढ़ती लागत से परेशान थे।
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष ए शक्तिवेल ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि ड्यूटी हटाने से भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए कपास की उपलब्धता में काफी सुधार होगा।
उन्होंने कहा, ''कपास आयात पर सीमा शुल्क हटाना समय की जरूरत है। इससे घरेलू बाजार में कपास की कीमतों को नियंत्रित करने, अच्छी गुणवत्ता वाली कपास की उपलब्धता बढ़ाने और पूरे कपड़ा उद्योग में उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी।''
शक्तिवेल ने कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कपड़ा और परिधान निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा, खासकर ऐसे समय में जब भारतीय निर्यातकों को कई अन्य कपड़ा उत्पादक देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले से विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों (एसएमई) को लाभ होगा, जो कपास और धागे की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण दबाव में थे।
तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केएम सुब्रमण्यम ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे निटवियर निर्माण क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा, ''उद्योग लंबे समय से कच्चे माल की बढ़ती लागत का बोझ कम करने के लिए उपायों की मांग कर रहा था। यह फैसला उत्पादन खर्च घटाने और निटवियर निर्यातकों के लिए कारोबारी माहौल बेहतर बनाने में मदद करेगा।”
साउथ इंडिया होजरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि सीमा शुल्क में यह अस्थायी छूट पूरे कपड़ा उद्योग को फायदा पहुंचाएगी। इसमें स्पिनिंग मिलें, कपड़ा निर्माता और परिधान निर्यातक सभी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि कपास की कीमतों में कमी आने से कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर होगी और तिरुप्पुर जैसे प्रमुख कपड़ा केंद्रों को बढ़ावा मिलेगा, जो भारत के निटवियर निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उद्योग से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई है कि इस फैसले से कपास की कीमतें स्थिर होंगी, निर्यात में वृद्धि होगी और देश के सबसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक कपड़ा उद्योग को नई गति मिलेगी।
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