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17 सितंबर, गुरुवार को सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को कन्या संक्रांति कहते हैं। संक्रांति पर सूर्य पूजा, स्नान, दान-पुण्य और पितरों से जुड़े धर्म-कर्म करने की परंपरा है।
ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, सूर्य देव जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे संक्रांति कहते हैं। सूर्य साल में 12 बार राशि बदलते हैं, इसलिए एक वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां आती हैं। शास्त्रों में संक्रांति को भी पर्व की तरह महत्व दिया गया है। यही वजह है कि इस दिन बड़ी संख्या में लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य कार्य करते हैं।
अभी बारिश का समय है, ऐसे में किसी सार्वजनिक जगह पर छायादार पेड़ का पौधा लगाना भी शुभ माना जाता है। पीपल को पितरों से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इस दिन पीपल का पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करने से कुंडली के पितृ दोषों का प्रभाव कम किया जा सकता है। भगवान विष्णु के भक्त श्रीकृष्ण, श्रीराम के मंदिरों में तुलसी का पौधा लगा सकते हैं। शिव भक्त शिव मंदिर में बिल्व यानी बेल का पौधा लगा सकते हैं। पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल की जिम्मेदारी लेना भी जरूरी है।
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